Āśramāgamanam — The Pāṇḍavas Arrive at Dhṛtarāṣṭra’s Hermitage
एते चान्ये च बहवो बहुत्वाद् ये न कीर्तिता: । सर्वे भासुरदेहास्ते समुत्तस्थुर्जलात्तत:,कर्ण, दुर्योधन, महारथी शकुनि, धूृतराष्ट्रके पुत्र महाबली दुःशासन आदि, जरासन्धकुमार सहदेव, भगदत्त, पराक्रमी जलसन्ध, भूरिश्रवा, शल, शल्य, भाइयोंसहित वृषसेन, राजकुमार लक्ष्मण, धृष्टद्युम्नके पुत्र, शिखण्डीके सभी पुत्र, भाइयोंसहित धुृष्टकेतु, अचल, वृषक, राक्षस अलायुध, राजा बाह्लिक, सोमदत्त और चेकितान--ये तथा दूसरे बहुत-से क्षत्रियवीर, जो संख्यामें अधिक होनेके कारण नाम लेकर नहीं बताये गये हैं, सभी देदीप्यमान शरीर धारण करके उस जलसे प्रकट हुए
ete cānye ca bahavo bahutvād ye na kīrtitāḥ | sarve bhāsuradehās te samuttasthur jalāt tataḥ ||
Vaiśampāyana dit : « Ceux-là, et bien d’autres encore — trop nombreux pour être cités un à un — apparurent aussi. Tous, revêtus de corps resplendissants, s’élevèrent hors de cette eau. »
वैशम्पायन उवाच