Adhyāya 325: Nārada in Śvetadvīpa—Stotra to the Nirguṇa Mahātman
स्त्रीभि: परिवृतों धीमान् ध्यानमेवान्वपद्यत,तदनन्तर जब दो घड़ी रात बाकी रह गयी, उस समय ब्रह्मवेलामें वे पुन: उठ गये और शौच-स्नान करनेके अनन्तर बुद्धिमान् शुकदेव फिर परमात्माके ध्यानमें ही निमग्न हो गये। उस समय भी वे सुन्दरी स्त्रियाँ उन्हें घेरकर बैठी थीं
El prudente Śukadeva, aunque rodeado de mujeres, se entregó únicamente a la meditación.
भीष्म उवाच