मध्यंदिनगतं सूर्य प्रतपन्तमिवाम्बरे । नाशवनुवन्त सैन्यानि पाण्डवं प्रति वीक्षितुम्,“आकाशमें दोपहरके समय प्रचण्ड किरणोंसे तपते हुए सूर्यकी ओर जैसे कोई देख नहीं सकता, उसी प्रकार प्रतापी पाण्डुपुत्रकी ओर कौरव-सैनिक आँख उठाकर देखनेमें भी असमर्थ हो गये हैं
“As no one can look up at the midday sun blazing in the sky with fierce rays, so the Kaurava soldiers became unable even to raise their eyes to gaze upon the mighty son of Pāṇḍu.”
वैशम्पायन उवाच