भीमस्य बल्लव-प्रतिज्ञा तथा अर्जुनस्य बृहन्नडा-रूप-निर्णयः
Bhīma’s Ballava Vow and Arjuna’s Decision to Become Bṛhannadā
(गिरीणां प्रवरो मेरुदेवानां मधुसूदन: । ग्रहाणां प्रवरश्नन्द्र: सरसां मानसं वरम् ।।) यथैतानि विशिष्टानि जात्यां जात्यां वृकोदर । एवं युवा गुडाकेश: श्रेष्ठ: सर्वधनुष्मताम्,जैसे तपनेवाले तेजस्वी पदार्थोमें सूर्य श्रेष्ठ हैं, मनुष्योंमें ब्राह्मणका स्थान ऊँचा है, जैसे सर्पोमें आशीविष जातिवाले सर्प महान् हैं, तेजस्वियोंमें अन्न श्रेष्ठ हैं, अस्त्र-शस्त्रोंमें वज्ञका स्थान ऊँचा है, गौओंमें ऊँचे कंधेवाला साँड़ बड़ा माना गया है, जलाशयोंमें समुद्र सबसे महान है, वर्षा करनेवाले मेघोंमें पर्जन्य श्रेष्ठ हैं, नागोंमें धृतराष्ट्र तथा हाथियोंमें ऐरावत बड़ा है, जैसे प्रिय सम्बन्धियोंमें पुत्र सबसे अधिक प्रिय है और अकारण हित चाहनेवाले सुहदोंमें धर्मपत्नी सबसे बढ़कर है, जैसे पर्वतोंमें मेरु श्रेष्ठ है, देवताओंमें मधुसूदन भगवान् विष्णु श्रेष्ठ हैं, ग्रहोंमें चन्द्रमा श्रेष्ठ हैं और सरोवरोंमें मानसरोवर श्रेष्ठ है। भीमसेन! अपनी-अपनी जातिमें जिस प्रकार ये पूर्वोक्त वस्तुएँ विशिष्ट मानी गयी हैं, वैसे ही सम्पूर्ण धनुर्धारियोंमें युवावस्थासे सम्पन्न यह गुडाकेश (निद्राविजयी) अर्जुन श्रेष्ठ है
girīṇāṁ pravaro merur devānāṁ madhusūdanaḥ | grahāṇāṁ pravaraś candraḥ sarasāṁ mānasaṁ varam || yathaitāni viśiṣṭāni jātyāṁ jātyāṁ vṛkodara | evaṁ yuvā guḍākeśaḥ śreṣṭhaḥ sarva-dhanuṣmatām ||
Yudhiṣṭhira said: “Among mountains, Meru is foremost; among the gods, Madhusūdana (Viṣṇu) is supreme; among the heavenly bodies, the Moon is pre-eminent; and among lakes, Mānasa (Mānasa-sarovara) is the best. Just as these are regarded as outstanding, each within its own kind—O Vṛkodara—so too this youthful Guḍākeśa (Arjuna) is the finest of all bowmen.”
युधिछ्िर उवाच