Udīcī-diśi Tīrtha-kīrtana
Northern Sacred Places Enumeration
नृगस्य यजमानस्थ प्रत्यक्षमिति नः श्रुतम् । अमाद्यदिन्द्र: सोमेन दक्षिणाभिद्धिजातय:,इस विषयमें हमारे सुननेमें आया है कि महायोगी एवं महायशस्वी मार्कण्डेयने यजमान राजा नृगके सामने उनके वंशके योग्य यशोगाथाका वर्णन इस प्रकार किया था --'पयोष्णीके तटपर उत्तम वाराहतीर्थमें यज्ञ करनेवाले राजा नृगके यज्ञमें इन्द्र सोमपान करके मस्त हो गये थे और प्रचुर दक्षिणा पाकर ब्राह्मणलोग भी हर्षोल्लाससे पूर्ण हो गये थे।” पयोष्णीका जल हाथसे उठाया गया हो या धरतीपर पड़ा हो अथवा वायुके वेगसे उछलकर अपने ऊपर पड़ गया हो तो वह जन्मसे लेकर मृत्युपर्यन्त किये हुए समस्त पापोंको हर लेता है
nṛgasya yajamānastha pratyakṣam iti naḥ śrutam | amādyad indraḥ somena dakṣiṇābhir dhijātayaḥ ||
Dhaumya said: “We have heard this as something witnessed directly at King Nṛga’s sacrifice: Indra became exhilarated by drinking Soma, and the twice-born (brāhmaṇas) were delighted and uplifted by the abundant sacrificial gifts (dakṣiṇās).”
धौम्य उवाच