Duryodhana’s Śaraṇāgati and the Pāṇḍavas’ Resolve
Gandharva Encounter
हि >> आय न (हुक है 7 7 > मनुष्योंको कष्ट देनेवाले ये तामस स्कन्दग्रह भगवान् रुद्रके भूत-प्रेतादि गणोंकी भाँति कुमार स्कन्दके शरीरसे उत्पन्न तमोमय कुमारके साथी माने जाते हैं। इन ग्रहोंसे रक्षा पानेके लिये भगवान् महेश्वरकी भक्ति करनी चाहिये। भय दिखाकर भी भगवानकी भक्ति करानेमें हेतुभूत होनेके कारण इन ग्रहोंका वर्णन यहाँ किया गया है। भगवानके भक्तोंको ये ग्रह छू भी नहीं सकते। तमोगुणी प्रजापर ही सब तामस ग्रहोंका बल काम करता है। और वही इनकी पूजा-अर्चना किया करते हैं। एकत्रिशर्दाधिकद्विशततमो< ध्याय: स्कन्दद्वारा स्वाहादेवीका सत्कार, रुद्रदेवके साथ स्कन्द और देवताओंकी भद्रवट-यात्रा, देवासुर-संग्राम, महिषासुर- वध तथा स्कनन््दकी प्रशंसा मार्कण्डेय उवाच यदा स्कन्देन मातृणामेवमेतत् प्रियं कृतम् । अथैनमब्रवीत् स्वाहा मम पुत्रस्त्॒वमौरस:,मार्कण्डेयजी कहते हैं--युधिष्ठिर! जब स्कन्दने इस प्रकार मातृगणोंका यह प्रिय मनोरथ पूर्ण किया, तब स्वाहाने आकर उनसे कहा--“तुम मेरे औरस पुत्र हो
Mārkaṇḍeya uvāca | yadā Skandena mātṝṇām evam etat priyaṁ kṛtam | athainam abravīt Svāhā mama putras tvam aurasyaḥ |
Mārkaṇḍeya said: “When Skanda had thus fulfilled this cherished desire of the Mothers, then Svāhā addressed him: ‘You are my own true-born son.’”
मार्कण्डेय उवाच