Duryodhana Seized by Citraseṇa; Kaurava Petition to Yudhiṣṭhira (दुर्योधनापहारः / चित्रसेनगन्धर्वग्रहणम्)
भुडुक्ते सा तत्र तं गर्भ सा तु नागं प्रसूयते । इसीलिये पुत्रार्थी मनुष्य करंजवृक्षपर रहनेवाली उस देवीको नमस्कार करते हैं। ये तथा दूसरे अठारह ग्रह मांस और मधुके प्रेमी हैं और दस राततक सूतिका-गृहमें निरन्तर टिके रहते हैं। कटद्रू सूक्ष्म शरीर धारण करके गर्भिणी स्त्रीके शरीरके भीतर प्रवेश कर जाती है और वहाँ उस गर्भको खा जाती है। इससे वह गर्भिणी स्त्री सर्प पैदा करती है || ३६-३७ ३ || गन्धर्वाणां तु या माता सा गर्भ गृह गच्छति
bhūḍukte sā tatra taṃ garbhaṃ sā tu nāgaṃ prasūyate | gandharvāṇāṃ tu yā mātā sā garbha-gṛhaṃ gacchati |
Mārkaṇḍeya said: “There she devours the embryo; and thus the woman gives birth to a serpent. And she who is called the Mother of the Gandharvas goes to the lying-in chamber.”
मार्कण्डेय उवाच