आरण्यकपर्वणि अध्यायः २१६ — इन्द्र-स्कन्द-संमुखता वज्रप्रहारश्च
Indra approaches Skanda; vajra strike and the arising of Viśākha
भूमौ निपतितो ब्रह्म॒न्नुवाच प्रतिनादयन् । नापराध्याम्यहं किंचित् केन पापमिदं कृतम्,ब्रह्म! बाण लगते ही वे मुनि पृथिवीपर गिर पड़े और अपने आर्तनादसे उस वन्य प्रदेशको गुँजाते हुए बोले, “आह! मैं तो किसीका कोई अपराध नहीं करता हूँ। फिर किसने यह पापकर्म कर डाला?”
Fallen to the ground, the sage spoke, O Brahman, his cry resounding through that forest land: “Alas! I have done no wrong at all. By whom has this sinful deed been done?”
व्याध उवाच