सौगन्धिकपुष्पप्रसङ्गः — The Saugaṇdhika Lotus and Bhīma’s Approach to Hanūmān
#2:8 #:23:.7 () मपटम अ्ा८् पजञज्चचत्वारिशर्दाधिकशततमो< ध्याय: घटोत्कच और उसके साथियोंकी सहायतासे पाण्डवोंका गन्धमादन पर्वत एवं बदरिकाश्रममें प्रवेश तथा बदरीवृक्ष, नर-नारायणाश्रम और गंगाका वर्णन युधिष्ठिर उवाच धर्मज्ञो बलवान् शूर: सत्यो राक्षसपुज्भव: । भक्तो5स्मानौरस: पुत्रो भीम गृह्नातु मा चिरम्,युधिष्ठिर बोले--अत्यन्त भयानक पराक्रम दिखानेवाले भीम! तुम्हारा औरस पुत्र राक्षसश्रेष्ठ घटोत्कच धर्मज्ञ, बलवान, शूरवीर, सत्यवादी तथा हमलोगोंका भक्त है। यह हमें शीघ्र उठा ले चले। जिससे भीमसेन! तुम्हारे पुत्र घटोत्कचद्वारा शरीरसे किसी प्रकारकी क्षति उठाये बिना ही मैं द्रौपदीसहित गनन््धमादन पर्वतपर पहुँच जाऊँ
Yudhiṣṭhira uvāca: dharmajño balavān śūraḥ satyo rākṣasapuṅgavaḥ | bhakto ’smān aurasaḥ putro Bhīma gṛhṇātu mā ciram ||
Yudhiṣṭhira said: “O Bhīma, your own son—Ghaṭotkaca, the foremost among the Rākṣasas—is righteous, strong, heroic, truthful, and devoted to us. Let him lift us up at once, so that, without any bodily harm, I may reach Mount Gandhamādana together with Draupadī.”
युधिष्ठिर उवाच