ततः किरातास्तद् दृष्टवा प्रार्थयन्तो महीपते । विनेशुर्विषमे तस्मिन् ससर्पे गिरिगह्दरे,महाराज! उस समय उस मधुका अद्भुत गुण सुनकर और उसे प्रत्यक्ष देखकर भीलोंने उसे पानेकी चेष्टा की; परंतु सर्पोंसे भरी हुई उस दुर्गम पर्वतगुहामें जाकर वे सब-के-सब नष्ट हो गये
Then the Kiratas, seeing it and longing for it, O king, entered that perilous mountain cavern filled with serpents—and there they all perished.
विदुर उवाच