Āśrama-dharma: Duties of the Four Life-Stages (आश्रमधर्मः)
अत्र गाथा यज्ञगीता: कीर्तयन्ति पुराविद: | वैखानसानां राजेन्द्र मुनीनां यट्टमिच्छताम्,राजेन्द्र! प्राचीन बातोंको जाननेवाले विद्वान् इस विषयमें यज्ञकी अभिलाषा रखनेवाले वैखानस मुनियोंकी कही हुई एक गाथाका उल्लेख किया करते हैं, जो यज्ञके सम्बन्धमें गायी गयी है
Here, O Rajendra, the sages who know the lore of old recite a gāthā sung concerning yajña—a verse spoken by the Vaikhānasa munis who long for sacrifice.
भीष्म उवाच