युधिष्ठिरस्य राज्याभिषेकः | Yudhiṣṭhira’s Royal Consecration
मुक्ता वीरक्षयात् तस्मात् संग्रामाद् विजितद्विष: । क्षिप्रमुत्तरकार्याणि कुरु सर्वाणि भारत,“गाण्डीवधारी अर्जुन, पाण्डुपुत्र भीमसेन, तुम और माद्रीपुत्र पाण्डुकुमार नकुल- सहदेव--ये सभी शत्रुओंपर विजय पाकर इस वीरविनाशक संग्रामसे कुशलपूर्वक बच गये, इसे भी महान् सौभाग्यकी ही बात समझनी चाहिये। भारत! अब आगे जो कार्य करने हैं, उन सबको शीघ्र पूर्ण कीजिये”
vaiśampāyana uvāca |
muktā vīrakṣayāt tasmāt saṅgrāmād vijitadviṣaḥ |
kṣipram uttarākāryāṇi kuru sarvāṇi bhārata ||
Freed from that battle which brought about the destruction of heroes, and having overcome your foes, swiftly accomplish all the remaining duties, O Bhārata.
वैशम्पायन उवाच