अहं लक्ष्मीरहं भूति: श्रीक्षाहं बलसूदन । अहं श्रद्धा च मेधा च संनतिर्विजिति: स्थिति:,बलसूदन! मैं ही लक्ष्मी हूँ। मैं ही भूति हूँ और मैं ही श्री हूँ। मैं श्रद्धा, मेधा, संनति, विजिति, स्थिति, धृति, सिद्धि, कान्ति, समृद्धि, स्वाहा, स्वधा, संस्तुति, नियति और स्मृति हूँ
“O Balasūdana, I am Lakṣmī; I am Bhūti; I am Śrī. I am Śraddhā and Medhā; I am Sannati, Vijiti, and Sthiti.”
शक्र उवाच