ब्राह्मणस्य पूर्वतरा वृत्तिः — The Earlier Ideal Conduct of a Brahmana
River-of-Saṃsāra Metaphor
सटड्कशिखरा भग्ना: समरे मुर्थ्नि ते मया । कि नु शक््यं मया कर्तु कालो हि दुरतिक्रम:,मेरे वेगसे सब देवता युद्धका मैदान छोड़कर एक साथ ही भाग खड़े हुए थे। वन एवं वनवासियोंसहित कितने ही पर्वत, मैंने बारंबार तुमलोगोंपर चलाये थे। तुम्हारे सिरपर भी सुदृढ़ पाषाण और शिखरोंसहित बहुत-से पर्वत मैंने फोड़ डाले थे; किंतु इस समय मैं क्या कर सकता हूँ; क्योंकि कालका उललड्घण करना बहुत कठिन है
ṣaṭaṅgaśikharā bhagnāḥ samare mūrdhni te mayā | ki nu śakyaṃ mayā kartuṃ kālo hi duratikramaḥ ||
Bhīṣma said: “In battle I have shattered on your head mountains with their many ridges and peaks. What, then, can I do now? For Time (kāla) is indeed hard to overstep.”
भीष्म उवाच