नात्यन्तं गुणवत् किंचिन्न चाप्यत्यन्तनिर्गुणम् । उभयं सर्वकार्येषु दृश्यते साध्वसाधु वा,कोई भी वस्तु ऐसी नहीं है जिसमें सर्वथा गुण-ही-गुण हो। ऐसी भी वस्तु नहीं है जो सर्वथा गुणोंसे वंचित ही हो। सभी कार्योंमें अच्छाई और बुराई दोनों ही देखनेमें आती हैं
Arjuna said: “Nothing is wholly endowed with virtue, nor is anything wholly devoid of virtue. In every undertaking, both are seen—the good and the bad.”
अजुन उवाच