आपद्धर्मनिर्णयः — विश्वामित्र-श्वपचसंवादः
Apaddharma Determination: Dialogue of Viśvāmitra and the Śvapaca
तमत्वरन्तं पलितं पाशानां छेदने तथा । संचोदयितुमारेभे मार्जारो मूषिकं तदा,बिलाव उस बन्धनसे तंग आ गया था। उसने देखा, चूहा जाल तो काट रहा है; किंतु इस कार्यमें फुर्ती नहीं दिखा रहा है, तब वह उतावला होकर बन्धन काटनेमें जल्दी न करनेवाले पलित नामक चूहेको उकसाता हुआ बोला--
Then the cat began to urge the mouse on, seeing that he was not hurrying in the cutting of the nooses.
भीष्म उवाच