श्रुतं मे तव मार्जार स्वमर्थ परिगृह्नत: । ममापि त्वं विजानासि स्वमर्थ परिगृह्नत:,'भैया बिलाव! तुमने अपनी स्वार्थसिद्धिपर ही ध्यान रखकर जो कुछ कहा है, वह सब मैंने सुन लिया तथा मैंने भी अपने प्रयोजनको सामने रखते हुए जो कुछ कहा है, उसे तुम भी अच्छी तरह समझते हो
“O cat, I have heard all that you said while clinging to your own advantage. And you too understand well all that I have said, keeping my own purpose in view.”
भीष्म उवाच