नानाविधान्यनीकानि पुत्राणां तव भारत । अर्जुनो व्यधमत् काले दिवीवाभ्राणि मारुत:,भरतनन्दन! युधिष्ठिरकी सेनाके सैनिक इधर-उधरसे घातक प्रहार कर रहे थे। जैसे वायु आकाशमें बादलोंको छिन्न-भिन्न कर देती है, उसी प्रकार उस समय अर्जुन आपके पुत्रोंकी विभिन्न सेनाओंका विनाश करने लगे
O Bharata, Arjuna was then shattering the many kinds of battle-divisions of your sons, just as the wind (Marut) rends the clouds in the sky.
संजय उवाच