त्वरया वासुदेवश्च धर्मराजश्न मारिष | यत्नेन महता वीरी वारयामासतुस्तत:,अपनी भुजाओंसे सुशोभित होनेवाले वे दोनों वीर दो साँड्ोंक समान गरज रहे थे। माननीय नरेश! उस समय भगवान् श्रीकृष्ण और धर्मराज युधिष्ठिरने शीघ्रतापूर्वक महान् प्रयत्न करके उन दोनों वीरोंको रोका
संजय उवाच