द्रोणकर्णयोः निशि संप्रहारः — Night Engagement with Droṇa and Karṇa
नाड़मिड्गति किंचिन्मे संतप्तस्य महेषुभि: । योत्स्यामि तु यथाशक्त्या त्वदर्थ जीवितं मम,“इस समय मेरा कोई भी अंग किसी प्रकारकी चेष्टा नहीं कर रहा है। मैं बड़े-बड़े बाणोंकी आगसे संतप्त हूँ, तथापि यथाशक्ति युद्ध करूँगा; क्योंकि यह मेरा जीवन तुम्हारे लिये ही है
“Now none of my limbs will answer; I am scorched by the burning of mighty arrows. Even so, I shall fight to the best of my strength, for my life is for your sake.”
संजय उवाच