दिष्ट्यैष तव बाणानां गोचरे परिवर्तते । प्रतिघाताय कार्यस्य दिष्ट्या च यततेडग्रत:,सौभाग्यसे ही यह दुर्योधन तुम्हारे बाणोंकी पहुँचके भीतर चक्कर लगा रहा है। यह भी भाग्यकी बात है कि यह तुम्हारे कार्यमें बाधा डालनेके लिये सामने आकर प्रयत्नशील हो रहा है
By good fortune, he now circles within the reach of your arrows. And by that same fortune, he has come forth to the front, striving to thwart your purpose.
वायुदेव उवाच