इदमस्तीत्यसम्भ्रान्तो ब्रुवन्नस्त्रेण मेदिनीम् । अभिटहत्यार्जुनक्षक्रे वाजिपानं सर: शुभम्,“यह रहा इनके पीनेके लिये जल” ऐसा कहकर अर्जुनने बिना किसी घबराहटके अस्त्रद्वारा पृथ्वीपर आघात करके घोड़ोंके पीनेयोग्य जलसे भरा हुआ सुन्दर सरोवर उत्पन्न कर दिया
Arjuna, unshaken, said, “Here it is,” and with his weapon struck the earth, bringing forth a fair lake filled with water fit for the horses to drink.
संजय उवाच