Adhyāya 69: Strategic duels under Bhīṣma’s command
Virāṭa–Bhīṣma; Arjuna–Aśvatthāmā; Bhīma–Duryodhana; Abhimanyu–Lakṣmaṇa
'श्रेष्ठ देवताओ! जो परम तत्त्व हैं, भूत, भविष्य और वर्तमान--तीनों जिनके उत्तकृष्ट स्वरूप हैं तथा जो इन सबसे विलक्षण हैं, जिन्हें सम्पूर्ण भूतोंका आत्मा और सर्वशक्तिमान् प्रभु कहा गया है, जो परम ब्रह्म और परम पदके नामसे विख्यात हैं, उन्हीं परमात्माने मुझे दर्शन देकर मुझसे प्रसन्न हो बातचीत की है। मैंने उन जगदीश्वरसे सम्पूर्ण जगत्पर कृपा करनेके लिये यों प्रार्थना की है कि प्रभो! आप वासुदेव नामसे विख्यात होकर कुछ कालतक मनुष्यलोकमें रहें और असुरोंके वधके लिये इस भूतलपर अवतीर्ण हों || ६-- ८ ।। संग्रामे निहता ये ते दैत्यदानवराक्षसा: । त इमे नृषु सम्भूता घोररूपा महाबला:,“जो-जो दैत्य, दानव तथा राक्षस संग्रामभूमिमें मारे गये थे, वे मनुष्यलोकमें उत्पन्न हुए हैं और अत्यन्त बलवान् होकर जगत्के लिये भयंकर बन बैठे हैं
bhīṣma uvāca | saṅgrāme nihatā ye te daityadānavarākṣasāḥ | ta ime nṛṣu sambhūtā ghorarūpā mahābalāḥ |
Bhishma said: “Those Daityas, Dānavas, and Rākṣasas who were slain in battle have now been born among human beings. Taking on dreadful forms and immense strength, they have become a terror to the world.”
भीष्म उवाच