Yuga-Lakṣaṇa and Varṣa-Pramāṇa Inquiry (युगलक्षण–वर्षप्रमाण–प्रश्न)
अष्टादश सहस्राणि योजनानि विशाम्पते । षट् शतानि च पूर्णानि विष्कम्भो जम्बुपर्वत:,राजन! जम्बूद्वीपका विस्तार पूरे १८,६०० योजन है। इसके चारों ओर जो खारे पानीका समुद्र है, उसका विस्तार जम्बूद्वीपकी अपेक्षा दूना माना गया है। उसके तटपर तथा टापूमें बहुत-से देश और जनपद हैं। उसके भीतर नाना प्रकारके मणि और मूँगे हैं, जो उसकी विचित्रता सूचित करते हैं। अनेक प्रकारके धातुओंसे हक 5 प्रतीत होनेवाले बहुसंख्यक पर्वत उस सागरकी शोभा बढ़ाते हैं। सिद्धों तथा से भरा हुआ वह लवणसमुद्र सब ओरसे मण्डलाकार है
aṣṭādaśa-sahasrāṇi yojanāni viśāmpate | ṣaṭ-śatāni ca pūrṇāni viṣkambho jambūparvataḥ ||
Sañjaya said: “O lord of the people, the breadth of Mount Jambū is eighteen thousand yojanas, with a further full six hundred yojanas besides.”
संजय उवाच