संस्मृत्य देवीं गान्धारीं धृतराष्ट्र च पार्थिवम् । उवाच दुःखशोकार्तत क्षत्रधर्म व्यगर्हयत्,जब दु:शला इस प्रकार करुणायुक्त वचन कहने लगी, तब अर्जुन राजा धृतराष्ट्र और गान्धारी देवीको याद करके दुःख और शोकसे पीड़ित हो क्षत्रिय-धर्मकी निन्दा करने लगे --
Remembering Queen Gāndhārī and King Dhṛtarāṣṭra, Pārtha (Arjuna), afflicted with grief and sorrow, spoke and censured the kṣatriya-dharma.
वैशम्पायन उवाच