हृष्टो>भवद् हृषीकेश: साधु साध्विति चाब्रवीत् | तुम्हारे पिताके जन्मस्थानको इस प्रकार आवश्यक वस्तुओंसे सुसज्जित देख भगवान् श्रीकृष्ण बहुत प्रसन्न हुए और “बहुत अच्छा” कहकर उस प्रबन्धकी प्रशंसा करने लगे || ७ ई | तथा ब्रुवति वार्ष्णेये प्रह्ृष्टटदने तदा
Vaiśampāyana said: “Hṛṣīkeśa was delighted, and he exclaimed, ‘Well done, well done!’”
वैशम्पायन उवाच