यो मां प्रयतते हन्तुं तपसा संशितव्रत: । ततस्तपसि तस्याथ पुन: प्रादुर्भवाम्यहम्,जो कठोर व्रतका पालन करनेवाला मनुष्य तपस्याके द्वारा मेरे अस्तित्वको मिटा डालनेका प्रयास करता है, उसकी तपस्यामें ही मैं प्रकट हो जाता हूँ
Whoever, steadfast in a severe vow, strives to destroy me by austerity—within that very austerity of his I appear again.
वायुदेव उवाच