शुन:सख उवाच सकृदुक्त मया नाम न गृहीतं त्वया यदि । तस्मात् त्रिदण्डाभिहता गच्छ भस्मेति मा जिरम्,शुन:ःसखने कहा--मैंने एक बार अपना नाम बता दिया फिर भी यदि तूने उसे ग्रहण नहीं किया तो इस प्रमादके कारण मेरे इस त्रिदण्डकी मार खाकर अभी भस्म हो जा-- इसमें विलम्ब न हो
Śunaḥsakha said: “I have spoken my name once; if you have not accepted it, then for that heedlessness, be struck by my tridaṇḍa (triple staff) and become ashes this very moment—without delay.”
शुन:सख उवाच