Phala of Vrata, Niyama, Svādhyāya, Dama, Satya, Brahmacarya, and Service (व्रत-नियम-स्वाध्याय-दम-सत्य-ब्रह्मचर्य-शुश्रूषा-फलप्रश्नः)
अपश्यं तत्र वेश्मानि तैजसानि महात्मनाम् । नानासंस्थानरूपाणि सर्वरत्नमयानि च,“तब मैंने महामनस्वी पुरुषोंको प्राप्त होनेवाले वहाँके तेजोमय भवनोंका दर्शन किया। उनके रूप-रंग और आकार-प्रकार अनेक तरहके थे। उन भवनोंका सब प्रकारके रत्नोंद्वारा निर्माण किया गया था
There I beheld the radiant mansions of the great-souled—of many designs and forms—built wholly of every kind of jewel.
भीष्म उवाच