पुष्पोपगं वाथ फलोपगं वा यः पादपं स्पर्शयते द्विजाय । सश्रीकमृद्ध॑ बहुरत्नपूर्ण लभत्ययत्नोपगतं गृहं वै,'जो ब्राह्मणकफो फल अथवा फूलोंसे भरे हुए वृक्षका दान करता है, वह अनायास ही नाना प्रकारके रत्नोंसे परिपूर्ण, धनसम्पन्न समृद्धिशाली घर प्राप्त कर लेता है
Vaiśampāyana said: Whoever gives to a brāhmaṇa a tree laden with flowers or laden with fruit, obtains—without strain—a prosperous, splendid home, filled with many kinds of jewels.
वैशम्पायन उवाच