ययातिरुवाच राज्यभाक् स भवेद् ब्रद्मन् पुण्यभाक् कीर्तिभाक् तथा | यो मे दद्यात् वय: पुत्रस्तद् भवाननुमन्यताम्,ययाति बोले--ब्रह्मन्! मेरा जो पुत्र अपनी युवावस्था मुझे दे, वही पुण्य और कीर्तिका भागी होनेके साथ ही मेरे राज्यका भी भागी हो। आप इसका अनुमोदन करें
Yayāti said: “O brāhmaṇa, whichever son gives me his youth shall share in merit and fame, and shall also have a share in my kingdom. Please approve this.”
शुक्र उवाच