अध्याय ७४: अक्रोध–क्षमा–निवासनीति
Chapter 74: Non-anger, Forbearance, and the Ethics of Residence
शकुन्तलामिमां शीघ्रं सहपुत्रामितो गृहात् । भर्तु: प्रापयतागारं सर्वलक्षणपूजिताम्,फिर उस बालकके बलको समझकर कण्वने अपने शिष्योंसे कहा--“तुमलोग समस्त शुभ लक्षणोंसे सम्मानित मेरी पुत्री शकुन्तला और इसके पुत्रको शीघ्र ही इस घरसे ले जाकर पतिके घरमें पहुँचा दो
कण्व उवाच