आदि पर्व, अध्याय 67 — गान्धर्वविवाह-समयः
Duḥṣanta–Śakuntalā: Gandharva Marriage and Succession Condition
महारथानां वीराणां कदनं च करिष्यति । सर्वेषामेव शत्रूणां चतुर्थाशं नयिष्यति,“तथा बड़े-बड़े महारथी वीरोंका संहार कर डालेगा। आधे दिनमें ही महाबाहु अभिमन्यु समस्त शत्रुओंके एक चौथाई भागको यमलोक पहुँचा देगा। तदनन्तर बहुत-से महारथी एक साथ ही उसपर टूट पड़ेंगे और वह महाबाहु उन सबका सामना करते हुए संध्या होते-होते पुनः मुझसे आ मिलेगा। वह एक ही वंशप्रवर्तक वीर पुत्रको जन्म देगा, जो नष्ट हुए भरतकुलको पुनः धारण करेगा।” सोमका यह वचन सुनकर समस्त देवताओंने “तथास्तु/ कहकर उनकी बात मान ली और सबने चन्द्रमाका पूजन किया। राजा जनमेजय! इस प्रकार मैंने तुम्हारे पिताके पिताका जन्म-रहस्य बताया है
vaiśampāyana uvāca | mahārathānāṃ vīrāṇāṃ kadanaṃ ca kariṣyati | sarveṣām eva śatrūṇāṃ caturthāṃśaṃ nayiṣyati |
Vaiśampāyana said: “He will bring about a slaughter of mighty chariot-warriors and heroes, and he will send a fourth part of all the enemies to the realm of Death.”
वैशम्पायन उवाच