अध्याय ३५ — वासुकिचिन्ता-शमनम्
Vāsuki’s Anxiety and Brahmā’s Confirmation
करवीर: पुष्पदंष्टो बिल्वको बिल्वपाण्डुर: । मूषकाद: शड्खशिरा: पूर्णभद्रो हरिद्रक:,नागोंमें सबसे पहले शेषजी प्रकट हुए हैं। तदनन्तर वासुकि, ऐरावत, तक्षक, कर्कोटक, धनंजय, कालिय, मणिनाग, आपूरण, पिंजरक, एलापत्र, वामन, नील, अनील, कल्माष, शबल, आर्यक, उग्रक, कलशपोतक, सुमनाख्य, दधिमुख, विमलपिण्डक, आप्त, कर्कोटक (द्वितीय), शंख, वालिशिख, निष्टानक, हेमगुह, नहुष, पिंगल, बाह्कर्ण, हस्तिपद, मुद्गरपिण्डक, कम्बल, अश्वतर, कालीयक, वृत्त, संवर्तक, पद्म (प्रथम), पद्म (द्वितीय), शंखमुख, कूष्माण्डक, क्षेमक, पिण्डारक, करवीर, पुष्पदंष्ट, बिल्वक, बिल्वपाण्डुर, मूषकाद, शंखशिरा, पूर्णभद्र, हरिद्रक, अपराजित, ज्योतिक, श्रीवह, कौरव्य, धृतराष्ट्र, पराक्रमी शंखपिण्ड, विरजा, सुबाहु, वीर्यवान् शालिपिण्ड, हस्तिपिण्ड, पिठरक, सुमुख, कौणपाशन, कुठर, कुंजर, प्रभाकर, कुमुद, कुमुदाक्ष, तित्तिरे, हलिक, महानाग कर्दम, बहुमूलक, कर्कर, अकर्कर, कुण्डोदर और महोदर--ये नाग उत्पन्न हुए
karavīraḥ puṣpadam̐ṣṭo bilvako bilvapāṇḍuraḥ | mūṣakādaḥ śaṅkhaśirāḥ pūrṇabhadro haridrakaḥ ||
Śaunaka said: “(Among the serpents born were) Karavīra, Puṣpadaṃṣṭa, Bilvaka, Bilvapāṇḍura, Mūṣakāda, Śaṅkhaśiras, Pūrṇabhadra, and Haridraka.”
शौनक उवाच