Garuḍa’s Assault on the Devas and the Fire-Barrier (अमृत-रक्षा-युद्धम्)
विनतोवाच समुद्रकुक्षावेकान्ते निषादालयमुत्तमम् | निषादानां सहस्राणि तान् भुक्त्वामृतमानय,विनताने कहा--समुद्रके बीचमें एक टापू है, जिसके एकान्त प्रदेशमें निषादों (जीवहिंसकों)-का निवास है। वहाँ सहस्रों निषाद रहते हैं। उन््हींको मारकर खा लो और अमृत ले आओ
पितामह उवाच