Hiḍimba’s Approach and Hiḍimbā’s Warning to Bhīmasena (हिडिम्बागमनम् / हिडिम्बा-भयवचनम्)
यथैनं भक्षितै: पादैर्व्याप्रो गृह्नातु वै ततः । ततो वै भक्षयिष्याम: सर्वे मुदितमानसा:,गीदड़ने कहा--भाई बाघ! तुमने वनमें इस हरिणको मारनेके लिये कई बार यत्न किया, परंतु यह बड़े वेगसे दौड़नेवाला, जवान और बुद्धिमान् है, इसलिये पकड़में नहीं आता। मेरी राय है कि जब यह हरिण सो रहा हो, उस समय यह चूहा इसके दोनों पैरोंको काट खाये। (फिर कटे हुए पैरोंसे यह उतना तेज नहीं दौड़ सकता।) उस अवस्थामें बाघ उसे पकड़ ले; फिर तो हम सब लोग प्रसन्नचित्त होकर उसे खायँगे
yathainaṁ bhakṣitaiḥ pādair vyāghro gṛhṇātu vai tataḥ | tato vai bhakṣayiṣyāmaḥ sarve mudita-mānasāḥ ||
The jackal said: “Let the tiger seize him only after his feet have been gnawed away. Then, with his speed broken, we shall all eat him, our minds delighted.”
जम्बुक उवाच