एकाग्र: स्यादविवृतो नित्यं विवरदर्शक: । राजन् नित्यं सपत्नेषु नित्योद्धिग्न: समाचरेत्,“राजा सदा शत्रुकी गतिविधिको जाननेके लिये एकाग्र रहे। अपने राज्यके सभी अंगोंको गुप्त रखे। राजन! सदा अपने शत्रुओंकी कमजोरीपर दृष्टि रखे और उनसे सदा सतर्क (सावधान) रहे
Vaiśampāyana said: “O king, be single-minded and never lay yourself open; be ever one who spies out the smallest breach. Among rivals, conduct yourself in constant vigilance, always on guard.”
वैशम्पायन उवाच