भरद्वाजपुत्रवधः
The Slaying of Bharadvāja’s Son and the Sage’s Lament
तथा कल्याणशीलस्त्व॑ ब्राह्म॒णेषु महात्मसु । अनागा: सर्वभूतेषु कर्कशत्वमुपेयिवान्,इस प्रकार महात्मा ब्राह्मणोंके प्रति तुम्हारा स्वभाव अत्यन्त कल्याणकारी था। किसी भी प्राणीके प्रति तुम कोई अपराध नहीं करते थे। फिर भी तुम्हारा स्वभाव कुछ कठोर हो गया था
„So war dein Wesen gegenüber den großherzigen Brāhmaṇa überaus heilsam. Gegen kein Lebewesen begingst du ein Unrecht. Und doch war dein Charakter irgendwie härter geworden.“
भरद्वाज उवाच