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Shloka 41

ममाज्ञया द्विजश्रेष्ठ द्रोणपुत्रोडभिषिच्यताम्‌ । सैनापत्येन भद्रं ते मम चेदिच्छसि प्रियम्‌,महाराज! प्रजानाथ! तब आपके पुत्रने उनसे कहा--'द्विजश्रेष्ठी] आपका कल्याण हो। यदि आप मेरा प्रिय करना चाहते हैं तो मेरी आज्ञासे द्रोणपुत्रका सेनापतिके पदपर अभिषेक कीजिये

„Bester der Brahmanen, auf meinen Befehl werde der Sohn Droṇas zum Heerführer geweiht; Heil sei dir, wenn du tun willst, was mir lieb ist.“

संजय उवाच