शल्यस्य सेनापत्याभ्युपगमः | Śalya’s Acceptance of Command
प्रलब्धश्न हृषीकेशस्तच्च कर्माविचारितम् । सच मे वचन ब्रह्मनू कथमेवाभिमन्यते,“ब्रह्मन्! पाण्डवोंके हितमें तत्पर रहनेवाले श्रीकृष्ण मेरे यहाँ दूत बनकर आये थे, किंतु मैंने उन हृषीकेशके साथ धोखा किया। मेरा वह कर्म अविचारपूर्ण था। भला, अब वे मेरी बात कैसे मानेंगे?
„Ich habe Hrishikesha getäuscht, und diese Tat war unbedacht. O Brahmane, wie sollte er meine Worte annehmen?“
संजय उवाच