व्यपनीतोड्द्य मन्युर्मे यस्त्वां प्रति पुरा कृत: । देवं पुरुषकारेण न शक््यमतिवर्तितुम्,“मैंने पहले जो तुम्हारे प्रति क्रोध किया था, वह अब दूर हो गया है; क्योंकि प्रारब्धके विधानको कोई पुरुषार्थद्वारा नहीं टाल सकता
„Der Zorn, den ich einst gegen dich hegte, ist nun gewichen; denn was das Schicksal verfügt, was zuvor bestimmt ist, kann durch menschliches Bemühen nicht überschritten werden.“
संजय उवाच