Draupadī’s Instruction on Marital Conduct and Household Discipline (चित्तग्रहण-उपदेश)
यावन्तः पावकाः: प्रोक्ता: सोमास्तावन्त एव तु । अन्रेश्नाप्यन्वये जाता ब्रह्मणो मानसा: प्रजा:,अद्भुतकी जो प्रियतमा पत्नी है, उसके गर्भसे उनके “विभूरसि” नामक पुत्र हुआ। अग्नियोंकी जितनी संख्या बतायी गयी है, सोमयागोंकी भी उतनी ही है। वे सब अग्नि ब्रद्माजीके मानसिक संकल्पसे अत्रिके वंशमें उनकी संतानरूपसे उत्पन्न हुए हैं
yāvantaḥ pāvakāḥ proktāḥ somās tāvanta eva tu | anṛśnāpy anvaye jātā brahmaṇo mānasāḥ prajāḥ ||
মার্কণ্ডেয় বললেন—যতগুলি পাৱক (অগ্নি) ঘোষিত হয়েছে, ততগুলিই সোমযাগ। সেই অগ্নিগুলি সাধারণ দেহজ জন্মে নয়; ব্রহ্মার মানস-সন্তানরূপে বংশপরম্পরায় প্রকাশিত হয়েছিল।
मार्कण्डेय उवाच