कृतयुगवर्णनम् तथा राजधर्मोपदेशः
Kṛtayuga Description and Instruction on Royal Dharma
ततस्तस्यैव शाखायां न्यग्रोधस्य विशाम्पते । आस्ते मनुजशार्दूल कृत्स्नमादाय वै जगत्,नरश्रेष्ठ राजन! बाहर आकर देखा तो उसी बरगदकी शाखापर उसी बाल-वेषसे सम्पूर्ण जगत्को अपने उदरमें लेकर श्रीवत्सचिह्लसे सुशोभित वह अमिततेजस्वी बालक पूर्ववत् बैठा हुआ है
তারপর, হে বিশাম্পতে, বাইরে বেরিয়ে আমি দেখলাম—সেই বটগাছের সেই-ই ডালে, সেই-ই বালকবেশে, সেই মনুষ্যশার্দূল পূর্বের মতো বসে আছে, যেন সমগ্র জগৎকে নিজের উদরে ধারণ করে রেখেছে।
वैशम्पायन उवाच