विदुरस्य कृष्णं प्रति शमोपदेशः
Vidura’s Counsel to Krishna on the Limits of Peace
त्वदर्थमुपनीतानि नाग्रहीस्त्वं जनार्दन | (दुर्योधन बोला--) जनार्दन! आपके लिये अन्न, जल, वस्त्र और शय्या आदि जो वस्तुएँ प्रस्तुत की गयीं, उन्हें आपने ग्रहण क्यों नहीं किया?
tvadartham upanītāni nāgrahīs tvaṃ janārdana |
দুর্যোধন বলল—জনার্দন! আপনার জন্য অন্ন, জল, বস্ত্র ও শয্যা প্রভৃতি যা উপস্থিত করা হয়েছিল, আপনি কেন তা গ্রহণ করলেন না?
वैशम्पायन उवाच