Udyoga Parva, Adhyaya 31 — Yudhiṣṭhira’s Instructions to Sañjaya
Peace Appeal and Five-Village Proposal
हीनप्रज्ञो दौष्कुलेयो नृशंसो दीर्घ वैरी क्षत्रविद्यास्वधीर: । एवंधर्मानापद: संश्रयेयु- हीनवीरयों यश्न भवेदशिष्ट:,जो लोग बुद्धिहीन, नीच कुलमें उत्पन्न, क्रूर, दीर्घकालतक वैरभाव बनाये रखनेवाले, क्षत्रियोचित युद्धविद्यामें अनभिज्ञ, पराक्रमहीन और अशिष्ट होते हैं, ऐसे ही स्वभावके लोगोंपर आपत्तियाँ आती हैं
যারা বুদ্ধিহীন, নীচ কুলজাত, নিষ্ঠুর, দীর্ঘকাল বৈরভাব পোষণকারী, ক্ষত্রিয়োচিত যুদ্ধবিদ্যায় অদক্ষ, পরাক্রমহীন ও অশিষ্ট—বিপদ-আপদ এমন স্বভাবের লোকদেরই আশ্রয় করে।
संजय उवाच