Strī Parva, Adhyāya 2 — Vidura’s Consolation on Kāla, Karma, and the Limits of Lamentation (विदुरोपदेशः)
एक्सरार्थप्रयातानां सर्वेषां तत्र गमिनाम् | यस्य काल: प्रयात्यग्रे तत्र का परिदेवना,जो एक साथ संसारकी यात्रामें आये हैं, उन सबको एक दिन वहीं (परलोकमें) जाना है। उनमेंसे जिसका काल पहले उपस्थित हो गया, वह आगे चला जाता है। ऐसी दशामें किसीके लिये शोक क्या करना है?
যারা একসঙ্গে সংসার-যাত্রায় বেরিয়েছে, তাদের সকলকেই একদিন সেই গন্তব্যে (পরলোকে) যেতে হবে। যার সময় আগে এসে পড়ে, সে আগে চলে যায়—এ অবস্থায় শোকই বা কেন?
विदुर उवाच