अध्याय ७२ — राजधर्मः: प्रजारक्षण, कर-नीति, दण्ड-नीति, अमात्य-नियोजन
Chapter 72 — Royal Duty: protection of subjects, taxation, punishment, and appointments
कामक्रोधौ पुरस्कृत्य यो<र्थ राजानुतिष्ठति । न स धर्म न चाप्यर्थ प्रतिगृह्लाति बालिश:,जो राजा काम और क्रोधका आश्रय लेकर धन पैदा करना चाहता है, वह मूर्ख न तो धर्मको पाता है और न धन ही उसके हाथ लगता है
kāmakrodhau puraskṛtya yo 'rthaṃ rājānutiṣṭhati | na sa dharmaṃ na cāpy arthaṃ pratigṛhṇāti bāliśaḥ ||
যে রাজা কাম ও ক্রোধকে অগ্রে রেখে অর্থসাধনে প্রবৃত্ত হয়, সে মূর্খ—সে না ধর্ম পায়, না অর্থই লাভ করে।
भीष्म उवाच