Śvetadvīpa-varṇana and Śāstra-pravartana (Śānti Parva 322)
उपतिष्ठति तिष्ठन्तं गच्छन्तमनुगच्छति । करोति कुर्वत: कर्म च्छायेवानुविधीयते,जिस-जिस मनुष्यने जैसा कर्म किया है, वह उसके पीछे लगा रहता है। यदि कर्ता पुरुष शीघ्रतापूर्वक दौड़ता है तो वह भी उतनी ही तेजीके साथ उसके पीछे जाता है। जब वह सोता है, तब उसका कर्मफल भी उसीके साथ सो जाता है। जब वह खड़ा होता है, तब वह भी उसके पास ही खड़ा रहता है और जब मनुष्य चलता है, तब वह भी उसके पीछे- पीछे चलने लगता है। इतना ही नहीं, कोई कार्य करते समय भी कर्म-संस्कार उसका साथ नहीं छोड़ता। सदा छायाके समान पीछे लगा रहता है
upatiṣṭhati tiṣṭhantaṃ gacchantam anugacchati | karoti kurvataḥ karma chāyevānuvidhīyate ||
ভীষ্ম বললেন—কর্ম ছায়ার মতো মানুষের অনুসরণ করে। সে দাঁড়ালে কর্মও পাশে দাঁড়ায়; সে চললে কর্ম পেছনে পেছনে চলে; সে যেখানে যায়, কর্মও সঙ্গে যায়। কর্তা যা-ই করে, সেই কর্ম তার ফলসহ তার সঙ্গে লেগে থাকে এবং কখনও তাকে ছাড়ে না।
भीष्म उवाच