Nakula’s Counsel on Yajña, Dāna, and Tyāga (नकुलोपदेशः—यज्ञदानत्यागविचारः)
एतस्मिन् वर्तमानस्य विधावप्रतिषेधिते । ब्राह्मणस्य महाराज नोच्छित्तिविद्यते क्वचित्,महाराज! इस गृहस्थ-आश्रममें ही रहकर वेद-विहित कर्ममें लगे हुए ब्राह्मगका कभी उच्छेद (पतन) नहीं होता
etasmin vartamānasya vidhāv apratiṣedhite | brāhmaṇasya mahārāja nocchittir vidyate kvacit ||
মহারাজ! যে ব্রাহ্মণ এই গৃহস্থ-অবস্থায় থেকে বেদবিহিত ও অপ্রতিষিদ্ধ বিধি অনুসারে আচরণ করে, তার কোথাও বিনাশ বা পতন ঘটে না।
नकुल उवाच