न तथा तेन तप्यामि यथा राजंस्त्वयाद्य वै “राजन! नीच पाण्डवोंने अत्यन्त क्रूरतापूर्ण कर्मके द्वारा मेरे पिताका वध किया था; परंतु उसके कारण भी मैं उतना संतप्त नहीं हूँ, जैसा कि आज तुम्हारे वधके कारण मुझे कष्ट हो रहा है!
na tathā tena tapyāmi yathā rājan tvayādya vai
সঞ্জয় বললেন—হে রাজন, সেই ঘটনার জন্য আমি যতটা দগ্ধ হইনি, আজ তোমার বধের জন্য ততটাই দগ্ধ হচ্ছি; পিতৃবধেও আমার এমন দহন হয়নি, যেমন তোমার বধে হচ্ছে।
संजय उवाच